
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शिखर बायो मास्क जो बिजली उत्पादन करता है भूषा से लेकिन आज कल जस्ट उल्टा हो रहा सैकड़ों गाड़ी कोयले से चल रहा है प्लांट अर्थात भूषा नहीं कोयले से चल रहा है प्लांट फिर भी शासन प्रशाशन खामोश जिसके चलते पर्यावरण में उड़ रहे धुआं और धूल से घरों में जम रही है परत पर्यावरण हो रहा है, दूषित

शासन प्रशाशन जब र्सैकडो पेड़ लगाने के लिए इन लोगों को देता है तो ये पेड़ शहर से दूर तालाब ढूंढ कर तालाब के ऊपर लगाते है पेड़ आखिर शासन इनको पेड़ कहा लगाने के लिए देती है और ये पेड़ कहा लगाते है सोचने वाली बात है करोड़ों का पेड़ पानी के अभाव में सुख कर खत्म हो जाता है, क्या शासन इनसे पूछती है कितने पेड़ बचे और कितने मरे नहीं शासन का करोड़ों का पेड़ नष्ट हो जाता है आखिर इसका जवाब दार कौन

सूत्रों ने ये भी बताया कि बगैर पानी के विद्युत पैदा नहीं किया जा सकता तो ये शिखर पावर प्लांट में पानी आता कहा से है और गंदा पानी जाता कहा है, आखिर कार सिद्ध होता है कि बड़ी बड़ी बोर से ही फैक्ट्री संचालन हो रहा है इसके बाद भी शासन प्रशाशन को कोई जानकारी नहीं यहां तक कोई कार्यवाही तक नहीं आखिर क्यों?
जनता का सवाल क्या नियम और कानून गरीब आम जनता के लिए है या बड़े लोगों के लिए भी आखिरकार भारत में एक देश एक कानून है तो उसका पालन क्यों नहीं हो रहा है









