Bilaspur arvind mishra shiv tiwari

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार शिखर पावर प्लांट जिसका परमिशन भूसे का है उसे कोयले से चलाया जा रहा है भूसा नहीं मिलने पर प्लांट बंद है करके ढिंढोरा पीटा जाता है और समय देखकर के कोयले से प्लांट शुरू कर विद्युत उत्पादन किया जाता है

सूत्रों ने ये भी बताया कि सैकड़ों गाड़ी कोयले का खपत इस प्लांट में होता है, जब ये भूसे से चलता है तो इतना कोयले की जरूरत क्यों
सूत्रों ने ये भी बताया कि शासन को बंद का नजराना दिखा कर कोयले से प्लांट चलाया जाता है और जब भी कोई पूछे तो प्लांट बंद चल रहा है कहते है आखिर ये कैसा नियम और कानून है कि कोयले से प्लांट चलने के बाद भी जिला प्रशाशन को पता ही नहीं चलता gst विभाग पर्यावरण विभाग की प्रतिक्रिया इस पर नजर नहीं आता आखिर क्यों,

जनता का सवाल,, भूसे का परमिशन है उसके बाद भी भूषा से प्लांट नहीं चलाया जाता आखिर क्यों, कोयला और बोर के पानी से प्लांट चलाया जा रहा है फिर जानकार अधिकारी इस पर कार्यवाही क्यों नहीं करते
अब देखने वाली बात है इस खबर के बाद जिला प्रशाशन इस पर संज्ञान लेकर कार्यवाही करता है या ठंडे बस्ते में डालता है









