बिलासपुर अरविंद मिश्रा शिव तिवारी

–छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से सिम्स प्रबंधन को बड़ा झटका लगा है। विगत 20 वर्षो से कार्यरत कर्मचारियों को एकतरफा रिलीव किए जाने के आदेश पर हाईकोर्ट जस्टिस सचिन सिंह राजपूत के सिंगल बेंच ने तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए आदेशित किया है की रिलीव किए गए नर्स एवम अन्य कर्मचारी उपस्थिति देकर सिम्स में ही कार्यरत रहेंगे। साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। बतादें की सिम्स की कर्मचारी गीता हालदार, दमयंती कश्यप, शारदा यादव, वी लक्ष्मी ने एडवोकेट सलीम काजी और फैज काज़ी के माध्यम से याचिका दायर कर कहा की वे सिम्स के स्थापना 2001 के पूर्व से वे अपनी सेवाएं दे रही है। 2001 से जब सिम्स की शुरूवात हुई तब उन्हें गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में प्रतिनियुति में माना गया, जबकि उनकी मंशा नहीं पूछी गई। वर्ष 2006 में सिम्स को पुनः शासन ने अधिग्रहित कर लिया और याचिकाकर्ताओं की सेवाएं संचालक, चिकित्सा शिक्षा में फिर से प्रतिनियुक्ति पर दे दी गईं। तब से याचिकाकर्ता सिम्स में ही सेवाएं दे रहे है। इसके बाद 28 जून, 2024 को सिम्स प्रशासन ने याचिकाकर्ताओं को अचानक रिलीव कर दिया और उन्हें सीएमएचओ कार्यालय में कार्यभार लेने आदेशित कर दिया। दूसरी ओर सीएमएचओ ने इन कर्मचारियों को ज्वाइनिंग देने से इस आधार पर इनकार कर दिया कि उन्हें ऐसा कोई आदेश शासन से प्राप्त नही हुआ है। अब सिम्स के इस आदेश से परेशान होकर याचिकाकर्ताओं ने सिम्स में याचिका प्रस्तुत कर कहा सिम्स प्रशासन ने सर्विस लॉ का मखौल बना लिया है और बिना कर्मचारियों की मंशा जाने उन्हें एक विभाग से दूसरे विभाग में कार्य करने आदेशित कर रहे हैं जो कि फंडामेंटल रूल्स के विपरीत होने के साथ साथ कर्मचारी के संवैधानिक अधिकारों का भी हनन है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद कर्मचारियों को एक बड़ी राहत देते हुए उन्हे सिम्स में ही कार्यरत रहने का निर्देश दिया है।

