जांजगीर,,, शिव तिवारी

जांजगीर के शारदा चौक निवासी और कांग्रेस नेता पंचराम यादव ने 30 अगस्त को एक ऐसा कदम उठाए जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया अपने परिवार के साथ मिलकर उन्होंने जहर सेवन किया जिसके कारण उनके बड़े बेटे की सिम्स अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई और बाकी परिवार के तीन सदस्य पंचराम यादव उनकी पत्नी दिनेश नंदनी यादव और छोटा बेटा सूरज यादव गंभीर हालात में अस्पताल में भर्ती है
यह दुखद घटना किसी एक क्षणिक आवेश का परिणाम नहीं था बल्कि इसके पीछे एक लंबा और दर्दनाक संघर्ष था बताया जा रहा है कि पंचराम यादव और उनके परिवार कर्ज के तले दबा हुआ था, बाजार से लिया गया कर्ज और उसे चुकाने का दबाव इतना बढ़ गया था कि वह इससे बाहर निकलने का कोई रास्ता ही नहीं देख पाए संभवत यही निराशा उन्हें इस आत्मघाती कदम की ओर धकेल गई,
पंच राम यादव ने अपने परिवार के साथ 30 अगस्त को जहर का सेवन कर आत्महत्या का प्रयास किया उन्होंने दरवाजे को अंदर से बंद कर लिया ताकि उनकी स्थिति का पता किसी को ना चल सके जब पड़ोस में रहने वाली एक लड़की ने कई बार दरवाजा खटखटाया और कोई उत्तर नहीं मिला तो उसे संदेह हुआ इसके बाद उसने पड़ोसियों को सूचित किया जिन्होंने दरवाजा तोड़कर परिवार को अंदर में बेहोशी की हालत में पाया,
घटना की गंभीरता को देखते हुए सभी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया हालांकि उनकी स्थिति इतनी नाजुक थी कि उन्हें तुरंत बिलासपुर के सिम्स अस्पताल रेफर किया गया दुर्भाग्य वस पंचराम यादव के बड़े बेटे नीरज यादव के सिम्स में उपचार के दौरान मौत हो गई जबकि बाकी परिवार के तीन सदस्य अभी भी जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं
इस घटना ने समाज और प्रशासन दोनों को जाग जोड़ कर रख दिया है जहां एक तरफ लोग इस बात से स्तब्ध है कि आर्थिक तंगी और कर्ज का बोझ एक परिवार को इस कदर तोड़ सकता है वहीं प्रशासन इस घटना के पीछे के सटीक कर्ण की जांच में जुटी हुई है पुलिस का कहना है कि आत्महत्या के पीछे की सच्चाई का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है लेकिन प्रारंभिक संकेत कर्ज के बोझ की ओर ही इशारा कर रहे हैं
पंचराम यादव और उनके परिवार की यह कहानी इस बात का कड़ा सबक है कि कैसे कर्ज का जाल और आर्थिक तनाव किसी भी परिवार को विनाश की कगार पर पहुंचा सकता है यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं है यह पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों को समय पर ही सहायता करें और समर्थन दें,
इस दुर्घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि क्या हमारे समाज में मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा को लेकर पर्याप्त संवेदनशीलता और समर्थन है? यह आत्महत्या का मामला एक गहरी सामाजिक समस्या की ओर इशारा करता है जिस नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है,
इस घटना में सरकार पर भी सवाल उठता है की जिला अस्पताल हर जिले में है लेकिन फिर भी उन्हें बड़े अस्पतालों में रिफर किया जाता है क्या जिलों में स्वास्थ्य को लेकर पूर्ण व्यवस्था नही है जिसके कारण उन्हे रिफर किया जाता है ऐसा क्यो?

