बिलासपुर अरविंद मिश्रा शिव तिवारी

पूर्व पार्षद की दबंगई और पुलिस की लापरवाही से गई युवक की जान — रात 11 बजे की घटना ने बिलासपुर को झकझोरा
बिलासपुर। शहर में एक बार फिर सत्ता के रसूख और पुलिस की सुस्ती ने मिलकर एक निर्दोष की जान ले ली। कांग्रेस पार्टी के पूर्व पार्षद पूर्णानंद चंद्रा पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने बंगाली पारा निवासी सिद्धार्थ पांडे नामक युवक के साथ बीती रात करीब 11 बजे मारपीट की, और जाते-जाते उसे दुबारा जान से मारने की धमकी भी दी। इस धमकी के बाद से सिद्धार्थ गहरे भय और मानसिक दबाव में था।
घटना के तुरंत बाद सिद्धार्थ अपने साथ हुई मारपीट की शिकायत लेकर थाने पहुंचा, लेकिन वहाँ उसे न्याय नहीं, बल्कि पुलिस की बेरुख़ी का सामना करना पड़ा। सिद्धार्थ ने बाकायदा आवेदन दिया, परंतु थाने के स्टाफ ने न तो आवेदन की रिसीविंग दी, न कोई कार्रवाई की, बल्कि टालमटोल करते हुए उसे “कल आना” कहकर भगा दिया।
थाने से लौटने के कुछ ही घंटे बाद सिद्धार्थ के सीने में तेज दर्द उठा, और परिवार के लोग उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सिम्स प्रबंधन ने उसकी मृत्यु की पुष्टि की है। फिलहाल पोस्टमार्टम जारी है, जिससे यह पता लगाया जा रहा है कि मौत का कारण दिल का दौरा था या किसी और दबाव की वजह से उसकी जान गई।
इस घटना ने एक बार फिर कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब आम नागरिक अपनी सुरक्षा की उम्मीद लेकर थाने पहुंचता है, और वहीं लापरवाही व संवेदनहीनता का शिकार हो जाता है, तो यह पुलिसिंग पर सीधा कलंक है।
शहर के लोगों में इस घटना को लेकर आक्रोश और भय का माहौल है। नागरिक पूछ रहे हैं कि आखिर पुलिस प्रशासन किस दबाव में शिकायत लेने से बचता रहा, और क्यों सिद्धार्थ को उसकी मौत से कुछ घंटे पहले तक न्याय की सिर्फ झलक तक नहीं मिली।
अब यह देखना होगा कि प्रशासन और पुलिस विभाग इस मौत को महज “एक हादसा” मानते हैं या फिर सिद्धार्थ की मौत को न्याय दिलाने के लिए ठोस कार्रवाई कर, इस तरह के मामलों पर लगाम लगाने की हिम्मत दिखाते हैं।
अगर कानून रसूख़ के आगे झुक जाएगा, तो इंसाफ़ सिर्फ शब्दों तक सीमित रह जाएगा।

