Bilaspur arvind mishra shiv tiwari

बिलासपुर – सत्य और अहिंसा के प्रतीक, बाबा गुरु घासीदास जी की 269वीं जयंती के उपलक्ष्य में न्यायधानी बिलासपुर पूरी तरह से भक्ति के रंग में सराबोर नजर आई। जयंती की पूर्व संध्या पर बुधवार को शहर के ऐतिहासिक महंत बाड़ा से एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें ‘मनखे-मनखे एक समान’ का जीवंत संदेश देखने को मिला।
बुधवार की शाम बिलासपुर के हृदय स्थल महंत बाड़ा से जब बाबा गुरु घासीदास जी की शोभायात्रा प्रारंभ हुई, तो जनसैलाब देखते ही बनता था। दर्जनों डीजे और धुमाल की थाप पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु झूमते-नाचते नजर आए। सफेद ध्वजों और बाबा जी के जयकारों से पूरा शहर गुंजायमान हो उठा।
इस यात्रा की सबसे खास बात यह रही कि इसमें केवल सतनामी समाज ही नहीं, बल्कि सर्व समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया जिसमें अमित तिवारी नारद श्रीवास शैलेन्द यादव रमेश सोनकर सर्व समाज के लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया और यह दृश्य बाबा जी के उस संदेश को चरितार्थ कर रहा था जिसमें उन्होंने सभी मनुष्यों को समान बताया था।
जगह-जगह पर अखाड़ा प्रदर्शनों ने लोगों का उत्साह बढ़ाया। शहर के विभिन्न चौराहों पर सर्व समाज के प्रतिनिधियों द्वारा सात श्वेत ध्वजवाहकों का पुष्पहारों से स्वागत किया गया और मिष्ठान वितरण कर खुशियां बांटी गईं।
महंत बाड़ा से शुरू होकर यह यात्रा नेहरू चौक, प्रताप चौक, सदर बाजार, गोल बाजार, तेलीपारा, पुराना बस स्टैंड, मगरपारा और तालापारा होते हुए महाराणा प्रताप चौक पहुंची। अंत में, यह भव्य कारवां वापस महंत बाड़ा में पहुंचकर संपन्न हुआ।
पूरी शोभायात्रा के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे और लोगों में भारी उत्साह देखा गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि बिलासपुर की गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक समरसता की एक नई मिसाल भी पेश कर गया।

