बिलासपुर अरविंद मिश्रा शिव तिवारी

बिलासपुर।शहर के चर्चित निजी अस्पताल अपोलो का रवैया इन दिनों सुर्खियों में है। गरीबों के लिए बनी केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना को लागू करने की तमाम कोशिशों के बावजूद अस्पताल प्रबंधन अब तक अपनी मनमानी पर अड़ा है। न विधायक की घुड़की काम आई, न कांग्रेस अध्यक्ष की चेतावनी, न ही स्वास्थ्य विभाग के कई पत्रों का असर हुआ।
स्थानीय विधायक ने बीते दिनों अपोलो प्रबंधन को फटकार लगाई थी कि गरीबों को योजना का लाभ देने में जानबूझकर देरी की जा रही है। विधायक ने कहा था — “सरकार का आदेश है, गरीब मरीजों का इलाज आयुष्मान योजना से करें, वरना कार्रवाई होगी।” लेकिन अस्पताल प्रशासन ने हर बार वही जवाब दिया — ‘प्रक्रिया में है, जल्द शुरू करेंगे।’
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष ने भी तीखा बयान देते हुए कहा कि “अपोलो गरीबों का हक़ मार रहा है, ये सिर्फ पैसे वालों के लिए खुला है।” उन्होंने चेताया कि अगर अस्पताल ने जल्द योजना लागू नहीं की, तो पार्टी सड़क पर उतरेगी। पर लगता है, अपोलो को अब किसी चेतावनी या फटकार से फर्क नहीं पड़ता।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि अस्पताल को अब तक कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन हर बार जवाब में केवल औपचारिकता निभाई गई। विभाग की चुप्पी ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या प्रशासन किसी दबाव में है, या फिर बड़े अस्पतालों पर नियम लागू करना सिर्फ कागज़ी बात रह गई है?
इस बीच, शहर के गरीब मरीज सबसे ज़्यादा परेशान हैं। रोज़ाना कई लोग आयुष्मान कार्ड लेकर अपोलो पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें लौटा दिया जाता है। “हमारे पास इलाज कराने के पैसे नहीं हैं, सरकार ने कार्ड तो बना दिया पर फायदा नहीं,” एक बुज़ुर्ग मरीज ने बेबसी जताई।
आमजन का कहना है कि जब सरकारी योजनाएँ अमल में ही नहीं आतीं, तो उनका प्रचार क्यों? विपक्ष ने सवाल उठाया है — “क्या अपोलो कानून से ऊपर है?” क्या अपोलो में इलाज सिर्फ पैसों का,

